BACKGROUND: SOCIAL MEDIA AND POLITICAL ACTIVISM IN NEPAL Historical Context of Media-Driven Movements Nepal’s history of political change has often been intertwined with media, from the 2006 People’s Movement that ended King Gyanendra’s direct rule to the 2008 transition to...
सरकार द्वारा गठित सात समितियों में कुल संख्या 66, छह समितियों में महिला प्रतिनिधित्व 00, अधिमान्यता समिति में पुरुष प्रतिनिधित्व 100, संचार प्रतिनिधि कल्याण संमिति में महिला प्रतिनिधित्व 1 पुरुष प्रतिनिधित्व 99%, दलित 00, आदिवासी 00, मुस्लिम 00 छत्तीसगढ़ में...
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में गाजा पर इजरायल के हमले के विरोध में फिलिस्तीन समर्थक छात्रों के प्रदर्शन को पुलिस ने बहुत ही बेरहमी से……? आपको यह भी बताते चले कि उस दौरान यूनिवर्सिटी की ही फिलिस्तीनी छात्रा जो धरना...
देश और दुनिया में प्रेस की खराब स्थिति को देखते हुए कैलिफोर्निया के बजट में एक नया फैसला लिया है कि सिकुड़ते स्थानीय न्यूजरूम और लोकतंत्र पर हमलों के बीच, स्थानीय समाचार और उभरते पत्रकारों को आगे बढ़ाने के लिए...
नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर धीरे-धीरे अमल किया जा रहा है। इतिहास विषय के पाठ्यक्रम में यह बदलाव किया गया है कि दिल्ली सल्तनत एवं मुगल शासन का विवरण पुस्तकों से हटा दिया गया है। मतलब करीब सात सौ...
यह अध्ययन फिल्मों और सीरीज के माध्यम से इस बात की पड़ताल करता है कि हिन्दी सिनेमा अब आदिवासी समाज को किस प्रकार से देखता है, किस प्रकार उसे कहानी की परिधि से उठाकर मुख्य स्थान प्रदान करता है, और...
भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के तहत 1957 में नेशनल बुक ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। भारतीय भाषाओं में समाज में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करना इसके मुख्य उद्देश्यों में शामिल है।...
सिनेमा हमारी दृष्टि को एक ऐसे संसार से बदल देती है जो हमारी इच्छाओं के अनुरूप होता है। – आंद्रे बाज़ां मैंने पच्चीस साल बाद गुरु दत्त की महत्त्वाकांक्षी फ़िल्म काग़ज़ के फूल देखी। यह फ़िल्म कैनेडी सेंटर के...
पारुल सिंह* सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में एम.एफ. हुसैन की विवादित पेंटिंग्स (चित्र 1 और 2) मामले में फैसला दिया था। लेकिन उस दौर में इस मसले को लेकर कानून और कला, आदर्श और सांस्थानिक रवैये, प्राचीन भारतीय कला और...
आदर्श स्थिति के उलट जमीनी हकीकत हमेशा काफी अलग होती है। न्यूटन के गति के नियम या आइंस्टीन के विशेष सापेक्षता अपने मूल में अपॉलिटिकल यानी अराजनैतिक हो सकते हैं। लेकिन चूंकि उनकी व्याख्या और इस्तेमाल इंसान की मर्जी से...