नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर धीरे-धीरे अमल किया जा रहा है। इतिहास विषय के पाठ्यक्रम में यह बदलाव किया गया है कि दिल्ली सल्तनत एवं मुगल शासन का विवरण पुस्तकों से हटा दिया गया है। मतलब करीब सात सौ सालों के इतिहास को मिटा दिया गया है। यह किसी भी पैमाने पर एक लंबा कालखंड है। इसमें अब भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भारतीय परंपराओं को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
कई अन्य बातों के अतिरिक्त नाथूराम गोडसे के एक प्रशिक्षित आरएसएस प्रचारक होने और गांधीजी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात भी हटा दी गई है। कुंभ मेले का विवरण दिया गया है, लेकिन वहां भगदड़ में हुई मौतों और दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ का कोई जिक्र नहीं है।
भारतीय शिक्षा प्रणाली पर हिंदू साम्प्रदायिक तत्वों के पूरी तरह काबिज होने के पहले भी आरएसएस शाखाओं के जरिए समाज के साम्प्रदायिक संस्करण को शाखा बौद्धिकों, एकल विद्यालयों और शिशु मंदिरों जैसी कई पहलों के जरिए फैलाया जा रहा था। समय के साथ मुख्यधारा का मीडिया और सोशल मीडिया भी इसमें अपना हाथ बंटाने लगा।
जून के अंक 159 में








